वित्तविहीन शिक्षकों के फैसलों पर श्रेय की सियासत तेज, शिक्षक अधिकार यात्रा पर उठे सवाल आफताब आलम खां का तंज—भाजपा सरकार के निर्णयों का श्रेय लेने के लिए कुछ संगठन कर रहे दिखावे की राजनीति
वित्तविहीन शिक्षकों के फैसलों पर श्रेय की सियासत तेज, शिक्षक अधिकार यात्रा पर उठे सवाल
आफताब आलम खां का तंज—भाजपा सरकार के निर्णयों का श्रेय लेने के लिए कुछ संगठन कर रहे दिखावे की राजनीति
आनंद पब्लिक, महराजगंज
(लालजी यादव)
पनियरा/महराजगंज। माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षकों के हित में भाजपा सरकार की ओर से की गई घोषणाओं और प्रस्तावित व्यवस्थाओं को लेकर अब श्रेय लेने की सियासत तेज हो गई है। महराजगंज से निकाली गई शिक्षक अधिकार यात्रा को लेकर माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा (उमेश द्विवेदी गुट) ने तीखा हमला बोला है। संगठन के प्रदेश महासचिव आफताब आलम खां ने यात्रा को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे श्रेय लेने की कवायद करार दिया।
आफताब आलम खां ने आरोप लगाया कि एक तथाकथित स्वयंभू संगठन की ओर से महराजगंज से शिक्षक अधिकार यात्रा निकालने का दिखावा किया गया, जबकि यात्रा के पोस्टर में जिन पदाधिकारियों के नाम और तस्वीरें प्रमुखता से प्रदर्शित की गईं, उनमें से अधिकांश मौके पर मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के अधिकारों और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर केवल पोस्टर, यात्रा और प्रचार की राजनीति से किसी संगठन की नीयत साबित नहीं होती।
उन्होंने कहा कि लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा एमएलसी उमेश द्विवेदी के लंबे संघर्ष का परिणाम है कि प्रदेश सरकार ने माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए नए सिरे से सेवा नियमावली तैयार करने की घोषणा की है। उनके मुताबिक यह फैसला वित्तविहीन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण कदम है और इसका श्रेय वास्तविक संघर्ष करने वालों को ही मिलना चाहिए।
खां ने यह भी दावा किया कि राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को जिस तरह कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है, उसी तर्ज पर वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को भी कैशलेस उपचार सुविधा देने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। इसके लिए वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का डाटा एकत्र करने की प्रक्रिया प्रस्तावित है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इन निर्णयों की भनक लगते ही कुछ लोग इसका राजनीतिक लाभ और श्रेय लेने की कोशिश में सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने ऐसे नेताओं और संगठनों पर निशाना साधते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर या चुनाव के समय अचानक शिक्षकों के बीच पहुंचकर कोई व्यक्ति उनके संघर्ष का प्रतिनिधि नहीं बन जाता।
आफताब आलम खां ने कहा कि वित्तविहीन शिक्षक अब जागरूक हो चुके हैं और वे वास्तविक संघर्ष तथा महज प्रचार के बीच का अंतर समझते हैं। उन्होंने दावा किया कि शिक्षक किसी भी प्रकार की बहकावे की राजनीति का हिस्सा नहीं बनेंगे और अपने हितों के लिए किए जा रहे वास्तविक प्रयासों के साथ खड़े रहेंगे।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक भविष्य और स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा किसी व्यक्ति या संगठन के निजी श्रेय का विषय नहीं, बल्कि लाखों शिक्षकों के अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है। ऐसे में जरूरी है कि शिक्षक हित के नाम पर होने वाली गतिविधियों की वास्तविकता भी सामने आए और श्रेय की राजनीति के बजाय ठोस परिणामों पर चर्चा हो।
