आधी रात चला एसपी का तबादला हंटर: 13 दिन में थानेदार की छुट्टी, साढ़े पांच महीने बाद चौकी इंचार्ज भी जिले से बाहर!

आधी रात चला एसपी का तबादला हंटर: 13 दिन में थानेदार की छुट्टी, साढ़े पांच महीने बाद चौकी इंचार्ज भी जिले से बाहर!
रात 1 बजे तत्काल प्रभाव से आदेश—धर्मेंद्र सिंह पनियरा से सीधे सदर कोतवाल, चौकी इंचार्ज को बहराइच भेजा गया
आनंद पब्लिक, महराजगंज
(लालजी यादव )
महराजगंज। पुलिस महकमे में देर रात तबादले की ऐसी गाज गिरी कि सुबह होते-होते पुलिसिंग का पूरा समीकरण बदल गया। पुलिस अधीक्षक ने रात करीब 1 बजे तत्काल प्रभाव से तबादला आदेश जारी किया। आदेश सामने आते ही पुलिस महकमे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
सबसे ज्यादा चर्चा पनियरा थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह के तबादले को लेकर है। थाना संभाले अभी महज 13 दिन ही हुए थे कि उनकी कुर्सी बदल दी गई। उन्हें पनियरा से हटाकर सदर कोतवाली का कोतवाल बना दिया गया। सवाल यह है कि आखिर 13 दिन में ऐसा क्या बदल गया कि थाना बदलने की नौबत आ गई?
13 दिन में पनियरा से सदर—तबादला या नई जिम्मेदारी?
धर्मेंद्र सिंह का पनियरा में कार्यकाल इतना छोटा रहा कि थाने की व्यवस्था को समझने और अपनी कार्ययोजना को जमीन पर उतारने का मौका मिला भी या नहीं, यह सवाल अपनी जगह है। इसके बावजूद उन्हें जिले के महत्वपूर्ण सदर कोतवाली की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
एक तरफ महज 13 दिन में थाना बदला गया, दूसरी तरफ पुलिस महकमे में इस तबादले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, तबादले की आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की गई है, इसलिए चर्चाओं से अलग वास्तविक कारण पुलिस विभाग ही स्पष्ट कर सकता है।
साढ़े पांच महीने बाद चौकी इंचार्ज को बहराइच का रास्ता
वहीं मुजरिम चौकी इंचार्ज को करीब साढ़े पांच महीने की तैनाती के बाद जिले से बाहर बहराइच भेज दिया गया। यह तबादला भी तत्काल प्रभाव से किया गया है।
रात का आदेश, सुबह पुलिस महकमे में हलचल
आधी रात को जारी आदेश ने पुलिस विभाग में यह संदेश जरूर दे दिया कि एसपी की नजर पुलिसिंग की हर कड़ी पर है और जरूरत पड़ने पर कुर्सियां रातों-रात बदल सकती हैं।
लेकिन जनता के नजरिए से कुछ सवाल जवाब मांगते हैं—
क्या 13 दिन में थानेदार के प्रदर्शन का आकलन संभव है?
अगर धर्मेंद्र सिंह को पनियरा से हटाना जरूरी था तो सदर कोतवाली जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों?
साढ़े पांच महीने बाद चौकी इंचार्ज को जिले से बाहर भेजने की वजह क्या रही?
क्या इन तबादलों के पीछे कोई विशेष प्रशासनिक रिपोर्ट या पुलिसिंग का मूल्यांकन था?
अब निगाह इस बात पर है कि एसपी का यह ‘तबादला हंटर’ महज कुर्सियों की अदला-बदली साबित होता है या आने वाले दिनों में अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग पर भी इसका असर दिखाई देता है।
