सागौन कटा, बोटे गायब…अब जड़ों पर भी बुलडोजर! माधो नगर में वन संपदा की कथित लूट के बाद ‘सबूत मिटाने’ का खेल?

सागौन कटा, बोटे गायब…अब जड़ों पर भी बुलडोजर!
माधो नगर में वन संपदा की कथित लूट के बाद ‘सबूत मिटाने’ का खेल?
दिन-दहाड़े कटे पेड़, रात में लकड़ी पार होने का आरोप—वन विभाग की गश्त और निगरानी पर उठे बड़े सवाल
आनंद पब्लिक,महराजगंज
(लालजी यादव)
पनिरयरा, महराजगंज। माधो नगर
वन संपदा की सुरक्षा के दावे उस समय सवालों के घेरे में आ गए, जब बाकी रेंज के अंतर्गत माधो नगर गांव में एक विशाल सागौन बगीचे में पेड़ों की कटाई के बाद अब बुलडोजर चलाए जाने का मामला सामने आया। ग्रामीणों के मुताबिक, पहले सागौन के पेड़ों को मशीनों की मदद से गिराया गया, फिर उनकी कटाई कर मोटे-मोटे बोटे तैयार किए गए और कथित तौर पर रात के अंधेरे में वाहनों से लकड़ी बाहर भेज दी गई।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
आरोप है कि लकड़ी हटाए जाने के बाद अब उसी जमीन पर फिर बुलडोजर उतार दिया गया है। पेड़ों की बची जड़ों और ठूंठों को उखाड़कर जमीन समतल की जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या पेड़ काटने के बाद अब कटान के निशान भी मिटाए जा रहे हैं?
पेड़ गिरे तो विभाग सोता रहा, बुलडोजर चला तो भी खबर नहीं?
सागौन जैसे कीमती पेड़ों की कटाई कोई चुपके से जेब में रखकर ले जाने वाला मामला नहीं है। पेड़ काटने के लिए मशीनें लगीं, लकड़ी के मोटे बोटे तैयार हुए, वाहन लगे और कथित रूप से उनका परिवहन भी हुआ। इसके बावजूद यदि स्थानीय वन अमले को भनक तक नहीं लगी तो वन क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था आखिर किसके भरोसे चल रही है?
यदि विभाग को जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
और यदि जानकारी नहीं थी तो बीट स्तर से लेकर रेंज स्तर तक की गश्त व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बुलडोजर बना ‘सबूत मिटाने’ का हथियार?
सबसे गंभीर सवाल पेड़ों की जड़ों और ठूंठों को मशीन से उखाड़े जाने को लेकर है। पेड़ कटने के बाद ठूंठ और जड़ें मौके पर कटान के महत्वपूर्ण निशान हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें भी उखाड़कर जमीन समतल किए जाने से संदेह और गहरा रहा है।
क्या यह सामान्य सफाई है या कटान के निशान मिटाने की कोशिश?
इसका जवाब मौके का वैज्ञानिक निरीक्षण और निष्पक्ष जांच ही दे सकती है।
वन विभाग के सामने पांच सीधे सवाल
1. इतने बड़े पैमाने पर सागौन के पेड़ काटे गए तो स्थानीय वन अमले को इसकी जानकारी कब हुई?
2. कटे पेड़ों की संख्या, लकड़ी की मात्रा और मौके से निकासी का कोई रिकॉर्ड तैयार हुआ या नहीं?
3. लकड़ी ले जाने वाले वाहनों की जांच अथवा सत्यापन किया गया या नहीं?
4. पेड़ों की जड़ें और ठूंठ बुलडोजर से क्यों उखाड़े जा रहे हैं?
5. यदि कटान नियमविरुद्ध नहीं था तो पूरी प्रक्रिया की अनुमति और दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
जांच हुई तो खुल सकता है पूरा खेल
मामले की निष्पक्ष जांच में मौके की वीडियोग्राफी, पेड़ों की प्रजाति और संख्या का आकलन, कटे बोटों की बरामदगी, लकड़ी परिवहन से जुड़े वाहनों की पड़ताल तथा कटान की अनुमति संबंधी अभिलेखों की जांच अहम हो सकती है।
ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि जिम्मेदार चाहे ठेकेदार हो, मशीन संचालक हो या कोई अन्य व्यक्ति—जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
सवाल सिर्फ पेड़ों का नहीं, पहरेदारों का भी है
माधो नगर में यदि नियमों को दरकिनार कर सागौन की कटाई हुई है तो यह सिर्फ वन संपदा का नुकसान नहीं, बल्कि उस पूरी निगरानी व्यवस्था पर सवाल है जिसे पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।
पेड़ कट गए…लकड़ी निकल गई…अब जड़ें भी गायब की जा रही हैं।
ऐसे में जनता पूछ रही है—जंगल बचाने वाले कहां थे और बुलडोजर चलाने वालों को रोकने वाला कौन था?
आनंद पब्लिक की पड़ताल जारी रहेगी।
