महराजगंज में सरकारी आदेशों की उड़ी धज्जियां! छुट्टी में भी खुले निजी स्कूल, बीएसए की निगरानी फेल?

महराजगंज में सरकारी आदेशों की उड़ी धज्जियां! छुट्टी में भी खुले निजी स्कूल, बीएसए की निगरानी फेल?
पित्त विसर्जन के अवकाश में भी बच्चों को स्कूल बुलाने की शिकायत, हॉलमार्क लिखी बसों से ढोए गए नौनिहाल; सवाल—निजी स्कूलों पर विभाग का नियंत्रण कहां?
आनंद पब्लिक, महराजगंज
महराजगंज। सरकारी आदेशों का पालन कराने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उन्हीं की निगरानी व्यवस्था पर अब सवाल उठने लगे हैं। पित्त विसर्जन के अवसर पर घोषित अवकाश के बावजूद जिले में निजी स्कूलों के खुले रहने की शिकायतें सामने आई हैं। छुट्टी के दिन भी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और हॉलमार्क लिखी बसों से उनके आवागमन की सूचना ने बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
जब छुट्टी का आदेश जारी था, तो स्कूल खोलने की इजाजत किसने दी?
सरकारी आदेश के बावजूद यदि निजी विद्यालय संचालित हो रहे थे, तो यह महज छुट्टी की अनदेखी का मामला नहीं, बल्कि आदेशों के अनुपालन की जांच का विषय है। सवाल है कि क्या संबंधित स्कूल संचालकों को सरकारी निर्देशों की जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर उनकी अनदेखी की गई? यदि विद्यालय बिना अनुमति खुले थे, तो अब तक जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्कूल खुले, बसें चलीं, फिर विभाग की निगरानी किस काम की?
अवकाश के दिन भी बच्चों को स्कूल ले जाने की शिकायत ने विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। आखिर शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी थी या नहीं? यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि जानकारी नहीं थी, तो क्या विभाग की निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर है कि सरकारी आदेशों की अनदेखी के बावजूद उसे भनक तक नहीं लगती?
निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कौन लगाएगा?
अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित और व्यवस्थित शिक्षा व्यवस्था की उम्मीद में स्कूल भेजते हैं। ऐसे में अवकाश के दिन विद्यालय संचालन की शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। बेसिक शिक्षा अधिकारी को संबंधित विद्यालयों की जांच करानी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि अवकाश के दिन स्कूल किन परिस्थितियों में खुले रहे। यदि सरकारी आदेश के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब जवाबदेही से नहीं बच सकता शिक्षा विभाग
मामला केवल कुछ स्कूलों के खुले रहने तक सीमित नहीं है। असली सवाल सरकारी आदेशों की प्रभावशीलता और उन्हें लागू कराने वाली व्यवस्था का है। यदि निजी विद्यालय अपनी सुविधा के अनुसार छुट्टी और पढ़ाई का फैसला करने लगें, तो सरकारी निर्देशों का औचित्य क्या रह जाएगा?
महराजगंज में अब निगाहें बेसिक शिक्षा विभाग पर हैं। क्या अधिकारी मौके की जांच कर कार्रवाई करेंगे, या यह मामला भी सवालों और शिकायतों के बीच दबकर रह जाएगा? विभाग की चुप्पी और निष्क्रियता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कार्रवाई से ही मिल सकता है।
