मुहर्रम के जुलूस में दिखी हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी झलक,भाईचारे ने मिटा दीं मजहब की दीवारें

मुहर्रम के जुलूस में दिखी हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी झलक,भाईचारे ने मिटा दीं मजहब की दीवारें
आनन्द पब्लिक, महराजगंज (ब्यूरो प्रभारी मो. सलीमुल्लाह)
महराजगंज: कर्बला की ऐतिहासिक और हृदयविदारक घटना, जहाँ पैगम्बर मुहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके परिजनों पर जुल्म की इंतिहा कर उन्हें बेरहमी से शहीद कर दिया गया था, की याद में आज भी दुनिया भर का मुस्लिम समुदाय मुहर्रम मनाता है। इसी कड़ी में जनपद के विकास खंड नौतनवा अंतर्गत ग्राम सभा अमहवां से आपसी सौहार्द और भाईचारे की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है, जहाँ मुहर्रम का जुलूस हिंदू-मुस्लिम एकता का अनूठा प्रतीक बन गया।
ग्राम सभा अमहवां में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मुहर्रम की 7वीं तारीख को सद्दाम बाबा के नेतृत्व में शोहदा-ए-कर्बला की याद में बेहद धूमधाम से जुलूस निकाला गया। इस दौरान न सिर्फ अकीदत का सैलाब उमड़ा, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब का एक बेमिसाल नजारा भी देखने को मिला। इस जुलूस की सबसे खास बात यह रही कि इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। दोनों पक्षों की मौजूदगी ने समाज में शांति, एकता और आपसी मोहब्बत का एक कड़ा संदेश दिया। दोनों समुदायों के लोगों ने एक साथ मिलकर जुलूस को सफल बनाया और अपनी अटूट मोहब्बत का सबूत पेश किया। इस मौके पर दूर-दूर से आए अकीदतमंदों ने सद्दाम बाबा से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में अमन-चैन और भाईचारे का माहौल बना रहा।
“कर्बला के शहीदों की याद में निकाला गया यह जुलूस सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और नफरतों को मिटाने का एक बड़ा जरिया साबित हुआ है।”
अमहवां गांव में शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हुआ यह जुलूस आज के दौर में सांप्रदायिक सौहार्द की एक बड़ी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
